मौका मिला है तो मैं समाज में बदलाव लाने की कोशिश करुँगी

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दिल्ली, समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगाँवलिया) । पीसीएस-जे में सफलता के लिए जरुरी है कि कड़ी मेहनत और लग्न के साथ तैयारी की जाए । ऐसा ही किया अंजुम सैफी ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC)  की पीसीएस (जे)-2016 परीक्षा के दौरान अपने पिता के सपने को पूरा करने के लिए l पीसीएस (जे)-2016 परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ, अंजुम सैफी ने जब सफल कैंडिडेट की सूची में अपना नाम देखा तो उनकी आंख से आंसू छलक आए, उनका गला रूंध गया और वो अपने पिता को याद कर रो पड़ीं । बस यही कह रही थी कि काश आज पापा यहां होते l काश मैं उनके साथ अपनी ये खुशियां बांट पाती l

1992 में अंजुम सैफी के पिता रशीद अहमद की बाजार में एक हार्डवेयर की दुकान थी l वो अपनी बेटी अंजुम को जज बनाने की बात कहा करते थे तब सिर्फ चार साल की थीं l वो हमेशा अन्याय और अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाते थे l रशीद अहमद ने एक दिन बदमाशों को हॉकर से पैसे छीनते देखा तो उन्होंने रोकने की कोशिश की l इसपर बदमाशों ने रशीद अहमद की गोली मारकर हत्या कर दी l

एक बेटी ने अपनी मेहनत और लगन से अपने पिता की मौत के 25 साल बाद उनके सपनों को साकार किया है l अपनी मेहनत और लगन से अंजुम अब जज बन गई हैं l मगर इस सपने को देखने वाले और उनका हौसला बढ़ाने वाले पिता नहीं हैं l

अंजुम ने कहा, ‘मेरे पिता ने सच की लड़ाई लड़ते हुए जान दी. वह हमेशा ही समाज में बेहतर बदलाव लाना चाहते थे l मेरी पूरी कोशिश रहेगी कि मैं उनके बताए रास्तों पर चल सकूं l अब मुझे वो मौका भी मिल गया है कि मैं समाज में बदलाव लाने की कोशिश कर सकती हूं l मैं अपने पिता के बलिदान को बेकार नहीं जाने दूंगी l

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