‘लव जिहाद’ के सहारे सामाजिक विघटन का बड़ा षड्यंत्र

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-संदर्भ: राजसमन्द में लव जिहाद के नाम पर बुजुर्ग की ह्रदयविदारक हत्या

-सुरेश खटनावलिया
राजस्थान में 6 दिसम्बर को एक ह्रदय विदारक वीडियो वायरल हुआ। राजसमंद में इस लाइव मर्डर के वीडियो के वायरल होने के साथ ही पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे एक शख्स लव जिहाद के नाम पर एक बुजुर्ग की हत्या कर रहा है, उसे किस तरह से गेंती से  मार रहा है। इस पिशाच की जितनी निंदा की जाय वह कम है। वीडियो में यह भी दिख रहा है कि लाल शर्ट पहने शख्स ने बुजुर्ग को काटने-मारने के बाद उसे आग के हवाले भी किया है। यह वीडियो  किसी की भी रूह कंपाने के लिए काफी है। इसके बाद कातिल लव जिहाद के लंबे चौड़े  भाषण के साथ कई वीडियो वायरल करता है। वीडियो में शख्स की भाव भंगिमाओं व बातों से प्रतीत होता है कि वह पूरी तरह से ब्रेन वाश्ड है।  उसे अपने किये पर जरा भी पश्चाताप नही है। वह समुदाय विशेष को चेतावनी भरे लहजे में धमकियां भी देता है।  हालांकि गुरुवार को इस कातिल को पुलिस ने गिरफ्तार कर उसे उसके अंजाम तक पहुंचाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में कोर्ट कातिल को सजा भी सुना देगा लेकिन मामला यही खत्म नही होता, इस घटना ने कई सुलगते सवाल छोड़ दिये जिनके जवाब जल्द तलाशने होंगे अन्यथा लव जिहाद के नाम पर कई दलित व युवा अपराध के दलदल में पूरी तरह धंसकर हत्या जैसे संगीन जूर्म कर बैठेंगे। सबसे पहला सवाल है कि आखिर ये लव जिहाद क्या बला है जिसके चलते इंसान इस हद तक पिशाच बन जाता है!   यह शब्द कब और क्यों  अस्तित्व में आया!  ज्यादातर मामले किसी न किसी रूप से दलितों से जुड़े ही दृष्टिगोचर क्यो हो रहे है!  क्या यह किसी की सोची समझी साजिश है या फिर कोई संगठन इसकी आड़ में अपना उल्लू सीधा कर रहा है! जवाब तलाशने के लिए हमे थोड़ा फ़्लैशबैक में जाना होगा…।
दरअसल,  लव जिहाद का नारा एक सोची समझी साजिश का हिस्सा बताया जा रहा है। सबसे पहले यह मुद्दा केरल और कर्नाटक के सीमाई जिलों में आरएसएस और श्रीराम सेना ने उठाया था, यही कारण था की इस नारे की आड़ में उन युवाओं पर बेरहमी से  हमले किये गए जो वैलेंटाइन दिवस मनाने के लिए रेस्तराओं में गएI हिन्दू धर्म की रक्षा के नाम पर सार्वजनिक तौर पर लड़कियों के बाल पकड़कर घसीटकर उन्हें  शारीरिक रूप से प्रताडित किया गया। विभिन्न टीवी चैनलों व समाचार पत्रों में  पर इस तरह की घटनाएं थोक के भाव दिखाई व  छापी गई।
  इतिहास इस बात का भी गवाह है कि हर तरह के साम्प्रदायिक दंगों में महिलाओं का इस्तेमाल किया जाता रहा हैI धर्म के मठाधीश हमेशा से ही महिलाओं के सवालों की आड़ में साम्प्रदायिक उन्माद फैलाने की कोशिश करते रहे हैI वे हमेशा अपने ब्यान में कहते हैं कि हमारी महिलायें असुरक्षित हैं और अकलियत के लोग हमारी महिलाओं को बहला-फुसलाकर उनका धर्म परिवर्तन करवाते हैंI लव जिहाद के नारे को इसी कड़ी में दुबारा से पुनर्जीवित किया गया हैI  चूँकि इस्लामिक  आतंकवाद अंतर्राष्ट्रीय र्पैमाने पर फैला हुआ है इसलिए लव-जिहाद का नारा आमजन में  काफी गंभीर असर डाल सकता हैI यह लोगों की जेहनियत में तो जिंदा रहेगा ही साथ देश में साप्रदायिक विभाजन करने में भी मुख्य भूमिका निभा सकता हैI कई  संगठनों ने सर्कुलर निकालकर अपनी जाति  की युवतियों को मोबाइल रखने के लिए मना कर दिया है ताकि वे युवाओं के संपर्क में न रह सकेI उनका मानना है की ऐसा करने से युवतियां दूसरे  धर्म तो क्या वे अपने धर्म के युवाओं के भी सम्पर्क में नहीं रहेंगी और अंतर-जातीय विवाह का भी खतरा टल जाएगाI राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ व उसका राजनीतिक संगठन हमेशा से ही अन्तर-जातीय विवाहों का विरोधी रहा हैI वे हमेशा इस तरह की शादियों  के खिलाफ युवाओं या  युवतियों के परिवारों को धमकी देते रहे हैंI उसने हमेशा इसे हिन्दू धर्म पर खतरे के रूप में देखा हैI वर्ण व्यवस्था के हिमायती ये संगठम कतई नहीं चाहेंगें की समाज में युवा खासकर लड़कियां अपनी मर्जी से अपना जीवन साथी चुनेI इसलिये राजनीतिक फायदे के लिए ये संगठन साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए ‘लव जिहाद’ जैसे नारों का उपयोग कर रहा  हैI अब तो यह चेहरा और भी क्रूर होता जा रहा है। इस्लामिक आतंकी संगठनो की तरह कुछ हिंदूवादी कट्टर संगठनों की ओर से लव जिहाद के नाम पर भोले भाले युवाओ का ब्रेनवाश कर उन्हें कथित हिन्दू ‘जिहादी’ के तौर पर तैयार किया जा रहा है। इसके लिए दलितों का  बेखुबी इस्तेमाल  किया जा रहा है। इन्हें लगातार धर्मान्धता के वीडियो व प्रवचनों से  पूरी तरह से शैतान बना रहे है ताकि, वह किसी की हत्या करने से भी नही हिचके।  शंभू रैगर की ये निर्मम सनक इसी साजिश का हिस्सा हो सकती है। उसने स्वीकार भी किया है कि ये हत्या उसने लव जिहाद  के नाम पर की है।  फिलहाल पुलिस भी उसके कबूलनामे को सही बता रही है।पुलिस यह भी बता रही है कि वह काफी समय से  धर्मान्धता के वीडियो देख रहा था। इसी का परिणाम है कि उसने जघन्य हत्याकांड को अंजाम दिया। अब  सवाल ये भी है कि धर्मान्धता व धर्मांतरण में अक्सर शूद्र ही मोहरा क्यो बन रहे है! हिंदू धर्म की  वर्णव्यवस्था के अन्य तीन वर्ण क्यों नहीं! यदि इसका जवाब खोजेंगे तो  वर्ण व्यवस्था में  निहित मिल जाएगा। इसके अनुसार इस चौथे वर्ण का कर्म तीनो वर्णो की सेवा बताया गया है। यह सेवा किसी भी रूप में हो सकती है। सदियों से इस वर्ग का इसी रूप में उपयोग किया गया है। हालांकि  बाबा साब ने भारतीय संविधान का निर्माण कर उसमें कई अधिनियमो को जोड़कर शूद्रों को हर क्षेत्र में बराबरी का दर्जा दिया है, लेकिन सदियों से शोषित यह वर्ग शैक्षिक, आर्थिक, राजनीतिक रूप से पिछड़ा होने के कारण अब तक मुख्य धारा में नहीं आ पाया है। इसलिए परोक्ष व अपरोक्ष रूप से इस वर्ग पर अन्य तीनो वर्गों का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। आज भी गांवो में ब्राह्मणी वर्ण के अनुसार ही व्यवस्थाएं संचालित होती है। यहाँ धर्म पर खतरा बताकर अलग- अलग सेना, वाहिनियां व संगठन अनपढ़ व कम पढ़े लिखे लोगों का ब्रेनवाश कर  उन्हें धर्म के रक्षक यानी ‘जेहादी’ के तौर पर तैयार कर रहे है।
धर्म पर खतरा तब क्यों नहीं जब…!
 हमारा समाज जो गैर बराबरी, सांप्रदायिक, जातीय, नस्लीय और लिंग के आधार पर भेद करता है। ‘लव जिहाद’ के सहारे समाज को विघटित करना बहुत आसान हो जाता है। पर यह ध्यान में रहे कि यह वही मुनवादी ताक़तें हैं, जो राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा सहित कई राज्यो में  गोत्रों के मध्यकालीन और बर्बर फरमानों का समर्थन करती  है, आदिवासी-दलित लड़के की सवर्ण जाति की लड़की से विवाह को मान्यता ही नहीं देता बल्कि ‘इज्ज़त के नाम पर हत्याएं’ भी करता है। डेल्टा मेघवाल जैसे कई प्रकरण है जिनकी दुराचार के बाद हत्या कर दी गईं। सवाल यह उठता है की हिन्दू धर्म तब खतरें में क्यों नहीं पड़ता जब दलित महिलाओं के साथ हिन्दू धर्म के ही लोग बलात्कार करतें हैं, उन्हें गाँव में नंगा घुमातें हैं, घरों में घुसकर उनके ही परिवार के सामने उन्हें ज़लील करते हैं? तब क्यों नहीं ये धर्म के ठेकेदार कोई वाहिनी बनाते कि हम अपनी दलित बहनों की रक्षा करेंगें? ऐसा ही आदिवासी महिलाओं के साथ किया जा रहा हैI हिन्दू धर्म के भीतर प्रभावशाली सामन्ती समूह जब दलित बस्तियों और गावों से दलितों को खदेड़ देते हैं तो क्यों नहीं इन  धर्म के ठेकेदारों के दिल दहलतेI जब वोट की राजनीति का सवाल उठता है तो दलित और आदिवासी भी व्यापक हिन्दू समुदाय का हिस्सा बन जाता हैI और जैसे चुनाव ख़त्म होते हैं, दलित फिर दलित और आदिवासी फिर से आदिवासी बन जाते हैंI लव जिहाद का नारा तो वैसे भी नारी रक्षा के लिए दिया गया हैI फिर इसका इस्तेमाल कोई भी सेना देश के गावों में जाती है और सामंती ताकतों का सर नहीं फोडती है जो दलित और आदिवासी महिलाओं की अस्मिताओं के साथ खेलते हैं? लेकिन भाजपा या आर.एस.एस ऐसा नहीं करेगी क्योंकि दलित और आदिवासी महिलाओं पर अत्याचार तो उन्ही के द्वारा चलाई जा रही वर्ण व्यवस्था के आधार पर ही हो रहा हैI
इसलिए…
मानव को मानव से जोड़ें, संकीर्णता को हम छोड़ें,
निर्माण करें हम प्रेम फूलों का, नफरत की दीवारें तोड़ें….।
प्रेम भाव से सबको देखें, हर कोई आँख का तारा हो,
प्रेम में डूबा, प्रेम से महका अपना जीवन सारा हो…।।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार  है)

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