भीनासर में सिंगाड़िया परिवार ने मृत्यु उपरांत “मृत्यु भोज” नहीं करने और “ओढावनी” नहीं लेने का निर्णय किया

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दिल्ली, समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगाँवलिया) । बुदवार 13 दिसंबर 2017 को रेगर मोहल्ला भीनासर में मोहनी देवी धर्म पत्नी स्व भँवर लाल (पोस्ट मास्टर) का स्वर्गवास हो गया था, जिनका अंतिम संस्कार करने के बाद सिंगाड़िया परिवार ने शुक्रवार 15 दिसंबर 2017 को परिवार व समाजहित में सामाजिक कुरीति को मिटाने हेतु “मृत्यु भोज” नहीं करने और “ओढावनी” नहीं लेने का बहुत ही अच्छा एवं सराहनीय निर्णय लिया । भविष्य में यह कदम समाजोत्थान हेतु बहुत ही उपयोगी साबित होगा।

समाज में एक भयंकर कुरीति (कैंसर बीमारी) पनपी हुई है। यह भयंकर कुरीति है “मृत्यु भोज” औऱ हर आदमी को डसने वाली “ओढावनी”। मौका था भीनासर में गोपाल चन्द्र जी, गनपत लाल जी व रेवन्त मल जी सिंगाड़िया की भाभी जी तथा राजीव लोचन, संजीव कुमार , चन्द्र प्रकाश, तारा चन्द की माता जी श्रीमती मोहनी देवी धर्म पत्नी स्व श्री भँवर लाल जी (पोस्ट मास्टर) का स्वर्गवास दिनांक 13-12-2017 को हो गया जिनका अंतिम संस्कार 14-12-2017 को किया गया। शुक्रवार 15-12-2017 साँय 7.00 बजे समाज के एक धड़ा (कुटुम्ब) को अपने घर इकट्ठा किया। अपने धड़े के भाइयों के सामने इन्होंने “मृत्यु भोज” नहीं करने और “ओढावनी” नहीं लेने का निर्णय सुनाया।

इस निर्णय को समाज के प्रबुद्ध जनो ने स्वीकार किया और मृत्यु भोज व ओढावनी नही लेने फैसला लिया। इसके साथ ही 12 दिन की बजाय 7 दिन बैठक रखने के भी निर्णय लिया गया।

हरिद्वार फ़ूल विसर्जन करने के बाद 7वें आखिरी दिन अपने घर हवन करके इस विधि को पूर्ण समापन करने का निर्णय लिया गया।

मृत्यु भोज व ओढावनी के हटाये जाने में समाज के सर्व गोपाल चन्द्र सिंगाड़िया (रीटा. वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी, उत्तर पश्चिम रेलवे, बीकानेर), पाबुलाल सिंगाड़िया, गनपत लाल सिंगाड़िया, मोहन लाल सिंगाड़िया (सेल टेक्स), मोहन लाल सिंगाड़िया (पटवारी), रूपाराम सिंगाड़िया (पटवारी) देव करण नवल (छोटी खाटू), रेवन्त मल सिंगाड़िया (नगर निगम), बाबू लाल सिंगाड़िया, बंकिम चन्द्र सिंगाड़िया (रेलवे वर्कशाप) जैसराज सिंगाड़िया (शिक्षा विभाग), सोहन लाल, नेमाराम, रमेश चंद, ओम प्रकाश, शिवकरन, राम प्रताप, केवल चन्द, शेखर चन्द, चंदुराम, महेश चन्द, सन्तोष कुमार, जगदीश प्रशाद, प्रेम कुमार, सुंदर लाल, अनुपम एंव अनेको समाज के गणमान्य जनो ने अपनी सहमती प्रकट की।

इस निर्णय से समाज में एक नई ऊर्जा पैदा होगी। समाज के उत्थान में गति मिलेगी। शिक्षा की ओर जागरुकता बढ़ेगी। राजनीति में वर्चस्व बढ़ेगा। आर्थिक रूप से कमजोर समाज के लोगो को बल मिलेगा व फिजूल खर्ची से निजात मिलेगी। आइये, समाज बन्धुओं दो कदम हम चलें है तो एक कदम आप भी चलिए। समाज उन्नति की ओर अग्रसर।

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