गाज़ियाबाद में ‘ग्रेट बुद्धा नेशनल अवार्ड’ का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ

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दिल्ली, समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगाँवलिया) । ग्रेट जाटव सभा के तत्वाधान में वीरवार 28 दिसम्बर 2017 को सेंट टेरेसा स्कूल, शक्ति खंड-2, इंदिरापुरम, गाज़ियाबाद में दोपहर 3 बजे भारत रत्न डॉ० भीमराव आंबेडकर तथा तथागत गौतम बुद्ध की विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाने वाले महानुभावो को सम्मानित करने हेतु ‘ग्रेट बुद्धा नेशनल अवार्ड’ के कार्यक्रम का आयोजन किया गया l जिसमे मुख्य अतिथि रामदास अठावले, केन्द्रीय सामाजिक न्याय एव अधिकारिता मंत्री एवम् अध्यक्षता पद्मश्री श्रीमती कल्पना सरोज (प्रमुख उद्योगपति) ने की l

गाज़ियाबाद में ‘ग्रेट बुद्धा नेशनल अवार्ड’ कार्यक्रम में भारत रत्न डॉ० भीमराव आंबेडकर तथा तथागत गौतम बुद्ध की विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाने वाले महानुभावो को मुख्य अतिथि माननीय केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास आठवले, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग भारत सरकार एवम् अध्यक्षता पद्मश्री श्रीमती कल्पना सरोज (प्रमुख उद्योगपति) के हाथो से ग्रेट बौध्दा अवार्ड एवम् प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया ।

सम्मानित किये जाने वाले महानुभावो में मोहन लाल खटनावलिया, रायपुर उपखण्ड अधिकारी, विनोद मेहरा, पत्रकार दैनिक भास्कर मेड़तासिटी, नवरतन गुसाईवाल, समाज सेवी (सचिव, सामाजिक न्याय एवं मानव गरिमा संस्थान), लीलावती रैगर, सामाज सेवी, पूनम चंद सुनारिवाल,समाजसेवी पुष्कर, किशन लाल, पटवारी अजमेर, त्रिलोक खटिक, समाजसेवी एवम् पार्षद, अमीत मेघवाल, समाजसेवी एवम् राजस्थान के ग्रेट जाटव सभा के प्रदेशाध्यक्ष एडवोकेट कमल भट्ट इत्यादि को अवार्ड से सम्मानित किया गया l

इसके अलावा प्रीतम खीची, नोरत मल रैगर,.सावन आरटिया, सुरेन्द्र मेघवाल, रामकिशोर भाटी,श्रवण लाल नवल आदि को प्रशस्ति पत्र के सम्मान से सम्मानित किया गया । राजस्थान के ग्रेट जाटव सभा के प्रदेशाध्यक्ष एडवोकेट कमल भट्ट ने अवॉर्ड प्राप्त कर राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं आयोजक मुकेश मासूम,एवम् जूरी सदस्य राकेश कुमार (वाइस प्रेसिडेंट), कैलाश मासूम(सदस्य, फिल्म सेंसर बोर्ड, भारत सरकार), किशोर मासूम(फिल्म यूनियन लीडर) को धन्यवाद दिया l

कार्यक्रम के उपरांत मुख्य अतिथि रामदास अठावले, केन्द्रीय सामाजिक न्याय एव अधिकारिता मंत्री ने सभी अवार्डधरियो का सम्मान करते हुए अपने निजी निवास सफदरगंज दिल्ली बंगले पर चाय पार्टी दी।

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1 COMMENT

  1. Now People are writing & being creating well established that for old or orthodox “Raigar “or “Rai-gar-an “as the case may be, many modern socialogical proto-astroliod and/or Indus people/Aboriginals etc. Being Transitional distinct thinkers are using as “Rai”.
    It seems that it is being started & appertaing practiced.
    Since as all Jain’s (bhandari,Kothari and Sharad,Soni etc.) So as the Sindhis writing (like mansukhani,chandini,veer chandini,lalwani etc.)to show their solidarity.
    Similarly all may use as “Rai” as this is a in practice by lot of for solidarity and neo-classical thoughts by new generation also.
    General Socialogical thoughts.
    ,,

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