अनुसूचित जाति के लड़के या लड़की से शादी करने पर मिलती है सरकार से 2.5 लाख की मदद

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दिल्ली, समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगाँवलिया) । सरकार द्वारा तमाम सामाजिक और राजनीतिक प्रयासों के बावजूद समाज में जाति व्यवस्था अभी भी मजबूत है l  समाज में फैली जातिप्रथा जैसी कुप्रथा को समाप्त करने व अंतरजातीय विवाह को बढ़ाने के लिए सरकार ने ‘डॉ. अंबेडकर स्कीम फॉर सोशल इंटीग्रेशन थ्रू इंटरकास्ट मैरिज’ स्कीम 2013 की शुरुआत की गयी l इस योजना का विचार बाबा साहेब अंबेडकर की शिक्षाओं से लिया गया है l “संविधान निर्माता डॉ. बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर ने समाज से छुआ छूत मिटाने के लिए रोटी-बेटी के संबंधों पर खासा जोर दिया है l”

‘डॉक्टर आंबेडकर स्कीम फॉर सोशल इंटीग्रेशन थ्रू इंटरकास्ट मैरिज’ के तहत अगर कोई गैर दलित व्यक्ति किसी दलित के साथ शादी करता है, तो उस दंपत्ति को 2.5 रुपए की मदद दी जाती है इस स्कीम के तहत हर साल 500 कपल को इस योजना के तहत लाभान्वित करने की योजना थी l हालांकि शुरू होने के बाद से ही यह योजना बेहतर तरीके से लागू नहीं हो पाई है।

इस शादी के लिए यह शर्त रखी गयी है कि यह दंपती का पहला विवाह हो, उनकी सालाना आय पांच लाख से अधिक ना हो और शादी का रजिस्ट्रेशन हिंदू मैरिज एक्ट के तहत हुआ हो l जोड़े को अपना आधार नंबर और उससे जुड़ा बैंक अकाउंट भी देना होगा। अगर आपके पास आधार से लिंक किया हुआ खाता नहीं है तो आप इस योजना का लाभ नहीं ले सकते हैं। योजना का लाभ लेने के लिए जोड़े को अपनी शादी के एक साल के भीतर ही इसका प्रस्ताव सरकार के पास सौंपना होगा। वरना आपको इसका कोई फायदा नहीं होगा। इसके अलावा प्रस्ताव में सांसद, विधायक या फिर जिलाधिकारी के हस्ताक्षर होने चाहिए यही नहीं ये शादी हिंदू मैरिज एक्ट के तहत कोर्ट मैरिज रजिस्टर्ड भी होनी चाहिए। अगर आपने दूसरी बार किसी दलित से शादी की तो इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। आधार लिंक बैंक खाते के अलावा इसमें कपल में से किसी एक का दलित होना यानि अनुसूचित जाति का होना अनिवार्य है, चाहे वह लड़का हो या लड़की। इस योजना का लाभ दोनों तरह से मिलेगा। पहली किश्त डेढ़ लाख की और दूसरी क़िस्त यानि बाकि एक लाख शादी के तीन साल पूरा होने के बाद मिलेंगे l

अंतरजातीय विवाह को जातीय व्यवस्था की बुराइयों से निपटने में ‘डॉक्टर आंबेडकर स्कीम फॉर सोशल इंटीग्रेशन थ्रू इंटरकास्ट मैरिज’  को एक सक्षम हथियार माना जा रहा है l आजकल आधुनिकता की बयार कहें या शहरीकरण से उपजी नयी सामाजिक संरचना, जिससे प्राचीन कुप्रथा टूट रही है और अब धीरे धीरे छोटे-छोटे कस्बे और गांवों में भी अंतरजातीय विवाह की स्वीकार्यता बढ़ रही है l

हालांकि अभी तक इस स्कीम के बहुत सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आये हैं क्योंकि पहले साल मात्र पांच जोड़ों को ही इस स्कीम का लाभ मिला, जबकि लक्ष्य 500 जोड़ों का था l 2015-16 में 522 आवेदन आये लेकिन 72 ही मंजूर किए गए l 2016-17 में 45 मामले दर्ज किए गए l और 2017 में अब तक 409 प्रस्ताव आए हैं l उनमें से केवल 74 जोड़ों को ही आर्थिक राशि देना मंजूर किया गया है l स्कीम का लक्ष्य पूरा ना होने पर अधिकारी बताते हैं कि ज्यादातर जोड़े स्कीम की शर्तों को पूरा नहीं कर पाते l स्कीम कम मामले ही मंजूर होने की वजह पर अधिकारी बताते हैं कि ज्यादातर जोड़े स्कीम की शर्तों को पूरा नहीं करते हैं l

करीब 43 हजार जोड़ों से बातचीत के आधार पर एक सर्वे जारी किया गया। इस आधार पर भारत में इंटरकास्ट मैरिज का आंकड़ा मजह 11 फीसदी था। जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, मेघालय और तमिलनाडु में 95 फीसदी शादियां अपनी ही जाति में की गईं। पंजाब, सिक्कम, गोवा, केरल में यह आंकड़ा 80 फीसदी है।

डॉ. अम्बेडकर विवाह योजना के अंतर्गत, आवेदन हेतु पात्रता निम्न है।

  1. इस योजना के प्रयोजन के लिए एक अंतर-जाति विवाह का अर्थ है शादी-विवाह जो दम्पतियों में से एक अनुसूचित जाति के अंतर्गत आता है और दूसरा एक गैर अनुसूचित जाति का हो। केवल अनुसूचित जाति वर्ग के युवक से यदि पिछड़ा या सामान्य वर्ग की युवती विवाह करेगी तो ही योजना का लाभ मिलेगा l इसी तरह अनुसूचित जाति वर्ग की युवती से पिछड़ा या सामान्य वर्ग के युवक द्वारा विवाह किया जाता है तो भी योजना का लाभ मिलेगा l
  2. विवाह हिन्दू कानून के अनुसार वैध होना चाहिए और विधिवत तहत पंजीकृत होना चाहिए तथा हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 कानूनी तौर पर विवाहित होने और इनका एक शपथ पत्र प्रदान करना होगा।
  3. दूसरे या बाद के विवाह पर कोई प्रोत्साहन उपलब्ध नहीं है।
  4. शादी के एक वर्ष के भीतर प्रस्तुत होने पर प्रस्ताव वैध माना जाएगा।
  5. नव विवाहित जोड़े की कुल वार्षिक आय 5.00 लाख रुपये सालाना आमदनी की सीमा रेखा तय की गई थी, लेकिन सरकार ने इसे अब समाप्त कर दिया है l यानी पांच लाख रुपये सालाना से अधिक कमाने वाले युवा भी इस योजना में फायदा ले सकते हैं l
  6. जो दंपती जो पहले ही राज्य सरकार / यूटी से प्रोत्साहन प्राप्त कर चुके हैं। प्रशासन के तहत फाउंडेशन से प्रोत्साहन के लिए पात्र नहीं हैं।

योजना के तहत मदद के लिए आवेदन पत्र:-

 

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