रैगर समाज में एक और साहसी कदम व नई पहल बिना दहेज़ केवल एक रुपया और एक नारियल में शादी सम्पन्न

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दिल्ली, समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगाँवलिया) । झुंझुनु, बेटी की शादी में दहेज का जुगाड़ करते देश में तमाम परिवार तबाह हो जाते हैं। लेकिन यह दर्द समझते हुए माईलाल सक्करवाल (प्रवासी जर्मनी) पुत्र स्वर्गीय बल्ला राम सक्करवाल सुपौत्र स्वर्गीय बुधाराम रैगर पूर्व चेयरमैन नगरपालिका राजगढ़, चूरू ने अपने पुत्र पंकज सक्करवाल की शादी गिरधारी लाल बंसीवाल निवासी झुंझुनु की पुत्री के साथ बिना दहेज़ केवल एक रुपया और एक नारियल लेकर की l माईलाल सक्करवाल ने अपने बेटे की शादी में केवल एक रुपया और एक नारियल लेकर बिना दहेज के शादी रचाकर रैगर समाज के सामने अनूठी मिसाल पेशकर प्रेरणास्पद उदाहरण प्रस्तुत किया है और दहेज उन्मूलन का संदेश दिया।

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दरअसल दहेज की बीमारी अमीर परिवारों ने ही शुरू की है अब उसे खत्म करने के लिए भी अमीर परिवार ही पहल कर शादी में महज एक रुपया और एक नारियल लेकर बिना दहेज के शादी रचाकर दहेजप्रथा के मुंह पर करारा तमाचा जड़ने का काम रहे हैं और समाज को संदेश दे रहे है कि शादियों में पैसे की बर्बादी रोकी जाए । इस पैसे का सदुपयोग दूसरे कार्यों में किया जाए तो बेहतर है।

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प्राप्त जानकारी के मुताबिक बुदवार 18 अप्रेल 2018 को झुंझुनु निवासी गिरधारी लाल बंसीवाल की बेटी की शादी सादुलपुर चूरू निवासी माईलाल सक्करवाल (प्रवासी जर्मनी) के बेटे पंकज सक्करवाल के साथ सादगीपूर्ण सम्पन्न हुई l इस शादी की खास बात ये रही कि माइलाल सक्करवाल रैगर ने अपने पुत्र पंकज की शादी में केवल एक रुपया और एक नारियल लिया है। किसी भी प्रकार से सोना-चांदी के गहने नहीं लिए और किसी तरह का दहेज़ संबंधी सामान भी नहीं लिया। गिरधारी लाल बंसीवाल की बेटी को अपने घर की दुल्हन बनाकर सामाजिक स्तर पर चल रहे अमीर-गरीब के भेदभाव को भी मिटाया है l

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शादी दो दिलों और दो परिवारों के मिलन का संस्कार है, समाज में इन दिनों शानो-शौकत ने इसे काफी खर्चीला बना दिया है। जितना भी खर्च कर दो कम ही माना जाता है। ऐसे में गरीब परिवार के लोग कर्जदार हो जाते हैं। लेकिन समाज में माईलाल सक्करवाल जैसे लोग हैं जोकि दहेजप्रथा के सभी रीति-रिवाजों से उपर उठकर बड़े ही सादगी भरे ढंग से विवाह की रस्में निभा रहे हैं । माईलाल सक्करवाल का मानना है कि लक्ष्मी स्वरूपा बेटी से बढ़कर कोई दहेज नहीं होता है l दहेज लेना बेटे को बेचना होता है l वहीं दुल्हे पंकज ने दहेज़ रहित शादी को माता व पिता की प्रेरणा मानते है l

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