महिला सशक्तीकरण की अवधारणा से प्रभावित महिला लखपति, ज़िले की पहली महिला हैवी ड्राइवर होने का गौरव प्राप्त किया

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दिल्ली, समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगाँवलिया) l  भिवानी, गांव मिरान निवासी लखपति जिले की पहली ऐसी महिला है जो भिवानी डिपो के रोडवेज ट्रेनिंग स्कूल से अपनी मेहनत और जज्बे की मिसाल पेश करते हुए हैवी लाइसेंस के लिए प्रशिक्षण हासिल कर रोडवेज के साथ-साथ अपनी गृहस्थी का स्टेयरिंग भी संभाल रही हैं। लखपति ने आम महिलाओ से हटकर एक ऐसा काम कर दिखाया है जिससे न केवल उसका नाम रौशन हो रहा है बल्कि पूरे ज़िले को वाहवाही मिल रही है।

महिला सशक्तीकरण, शारिरिक या मानसिक स्वतंत्रता,  समानता और न्याय की आधुनिक अवधारणा से प्रभावित लखपति ने लीक हटकर कौशल के बल पर बदलाव करते हुए महिलाओं की दुखदायी स्थिति से अपने आपको ऊपर उठाने पर केंद्रित करती दिख रही है l आज के समय में लगभग हर जगह चाहे वह गांव हो या शहर हर जगह महिला सशक्तिकरण पर चर्चा हो रही है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक गांव डोहका हरिया की लखपति नाम की महिला सात भाई बहनों में चौथे नंबर पर है। अब रोडवेज की बस में ड्राइवर की सीट पर बैठे और हाथ में स्टीरिंग थामे देखी जा सकती है l साल 2009 में पति से अनबन होने के बाद वह दो बच्चों के साथ उसी गांव में रहने का फैसला किया, फिलहाल, लखपति स्वास्थ्य विभाग में अनुबंधित आधार पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के तौर पर काम कर रही है। लेकिन लखपति के हौसलें अब भी बुलंद है। जिंदगी में उतार चढ़ाव के बावजूद अपने सपने पूरे करने की मेहनत लखपति को औरों से अलग बनाती है।

जब लखपति हैवी लाइसेंस के लिए रोडवेज डिपो में प्रशिक्षण के लिए पहुंची थी तो प्रशिक्षण केंद्र पर लखपति को बताया कि महिलाओं के लिए हैवी लाइसेंस ट्रेनिंग मुश्किल होती है। इस पर लखपति ने तपाक से उत्तर दिया था कि उसका मन तो हवाई जहाज चलाने को करता है। भले ही उसे कितनी ही परेशानी क्यों न उठानी पड़े वह ट्रेनिंग लेकर रहेगी।

लखपति ने 24 मई को रोडवेज के ट्रेनिंग स्कूल से पास आउट होने के बाद अपनी खुशी का इज़हार करते हुए कहा कि उसके रोडवेज पॉयलेट बनने के सपने का पहला पायदान पार हो चुका है, अब वह अगले लक्ष्य के लिए खुद को तैयार करेगी। रोडवेज ट्रेनिंग स्कूल भिवानी के इंचार्ज संदीप पंघाल ने बताया कि लखपति के इस जज्बे को देखते हुए अन्य महिलाएं भी अब ट्रेनिंग के लिए आगे आ रही हैं।

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