विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में किसान की बेटी हिमा दास ने स्वर्ण पदक हासिल कर इतिहास रचा

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भारत में खेल की दुनिया में हिमा दास के रूप में एक नए सितारे का उदय हुआ

दिल्ली, समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगाँवलिया) । असम की 18 साल की हिमा दास ने गुरुवार देर रात फिनलैंड के टेंपेयर शहर में AIFF अंडर-20 वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप की 400 मीटर दौड़ स्पर्धा में 51.46 सेकेंड का समय निकालकर गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया l वह महिला और पुरुष दोनों ही वर्गों में ट्रैक इवेंट में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय भी बन गई हैं। किसान की बेटी हिमा विश्व चैंपियनशिप में किसी भी स्तर पर स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट हैं।

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गुरुवार को देर रात फिनलैंड के टेंपेयर शहर में 400 मीटर दौड़ स्पर्धा में हिमा दास चौथे नंबर की लेन में दौड़ रही थी l हिमा दास अंतिम मोड़ के बाद रोमानिया की आंद्रिया मिकलोस से पिछड़ रही थी लेकिन अंत में काफी तेजी दिखाते हुए धावकों से काफी आगे आकर 400 मीटर की दौड़ 51.46 सेकेंड में पूरी कर गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया l  मिकलोस ने 52 .07 सेकेंड के साथ रजत पदक हासिल किया जबकि अमेरिका की टेलर मेनसन ने 52.28 सेकेंड के साथ कांस्य पदक जीता।

पी.टी. ऊषा ने 1984 ओलिम्पिक की 400 मीटर हर्डल रेस में चौथा स्थान पाया था तो वहीं मिल्खा सिंह 1960 के रोम ओलिम्पिक में 400 मीटर की दौड़ में चौथे स्थान पर रहे थे। इनके अलावा कोई भी खिलाड़ी ट्रैक इवेंट में मैडल के करीब नहीं पहुंच सका है।

हिमा का जन्म असम के नौगांव जिले के एक छोटे से गांव कांदुलिमारी के किसान परिवार में हुआ। हिमा संयुक्त परिवार में रहती हैं। उनके घर में 16 सदस्य हैं। हिमा के पिता रंजीत दास किसान हैं, उन के पास महज दो बीघा जमीन है उसी में खेती-बाड़ी करते हैं। दास परिवार के छह सदस्यों की रोजी-रोटी का जरिया खेती-बाड़ी ही है। उनकी मां जुनाली घर संभालती हैं। पिता अपनी बेटी पर पहले से गर्व करते थे, जो अब और बढ़ गया है।

हिमा का यहां तक का सफर इतना आसान नहीं था उनकी इस अपार सफलता के पीछे उनकी कड़ी मेहनत और हिम्मत का बड़ा योगदान है। हिमा चार भाई बहनों में सबसे बड़ी है। उसकी दो छोटी बहनें और एक भाई है। एक छोटी बहन 10वीं कक्षा में पढ़ती है जबकि जुड़वां भाई और बहन तीसरी कक्षा में हैं। हिमा खुद अपने गांव से एक किलोमीटर दूर स्थित ढींग के एक कालेज में 12वीं की छात्रा है।

बेटी को एथलीट बनाने के लिए परिवार के पास पैसे की कमी थी लेकिन शुरुआत से ही उनके कोच ने उनकी सहायता कर आज हिमा को एक नया मुकाम दिलाया। एथलीट बनने के लिए हिमा को अपना परिवार छोड़कर लगभग 140 किलोमीटर दूर आकर रहना पड़ा। पहले तो परिवार वाले इस बात के लिए राजी नहीं थे, हालांकि कोच निपोल के कहने पर परिवार राजी हुआ और फिर जो हुआ वो आज इतिहास बन गया।

असम की हिमा दास ने दौड़ के बाद कहा, ‘‘विश्व जूनियर चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर मैं काफी खुश हूं। मैं स्वदेश में सभी भारतीयों को धन्यवाद देना चाहती हूं और उन्हें भी जो यहां मेरी हौसला अफजाई कर रहे थे।’

हिमा के पिता रंजीत ने असम में अपने गांव से कहा, वह बहुत जिद्दी है। अगर वह कुछ ठान लेती है तो फिर किसी की नहीं सुनती लेकिन वह पूरे धैर्य के साथ यह काम करेगी। वह दमदार लड़की है और इसलिए उसने कुछ खास हासिल किया है। मुझे उम्मीद थी कि वह देश के लिए कुछ विशेष करेगी।’

हिमा जब कंपीटिशन में हिस्सा ले रही थी तब उनके असम के नागोन जिले स्थित कांदुलिमारी गांव में लोग उन्हें बड़ी स्क्रीन पर दौड़ता देख रहे थे। हिमा के जीतते ही उनके आवास पर आस पड़ोसियों और रिश्तेदारों का आना शुरू हो गया और सभी ने एक दुसरे को मिठाईयां बांटकर इसका जश्न मनाया।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ट्वीट कर बधाई देते हुए कहा कि स्वर्ण जीतने के लिए हमारी शानदार स्प्रिंट स्टार हिमा दास को बधाई। यह असम और भारत के लिए गर्व का विषय है। हिमा से अब ओलंपिक में पदक का इंतजार है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर लिखा है, हिमा दास की जीत में ना भुलाए जाने वाले लमहे. जीतने के तुरंत बाद उसे तिरंगा ढूंढ़ते हुए देखा और राष्ट्रगान गाते समय उनका भावुक हो जाने ने मुझ पर गहरा असर किया.’

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