रैगर समाज के संशोधित गोत्र समाज की एक गंभीर समस्या है

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दिल्ली, समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगाँवलिया) । फिलहाल विभिन्न स्त्रोतों से प्राप्त गोत्रों की सूंची के अनुसार रैगर समाज के लगभग 524 गौत्र बताये जा रहे है जो रैगर दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, गुजरात,मध्य प्रदेश में निवास करते है और जिस प्रकार गौत्र बिगाड कर गौत्र बढाये जा रहे है, यह भविष्य मे 524 से 1000 तक पहुंच जाये तो कोई बड़ी हैरानी नही होगी । लेकिन ऐसे मे मूल रैगर गौत्र लुप्त होने से रैगर जाति की पहचान करना मुश्किल हो जायेगा और ऐसे मे समाज मे शादी विवाह के लिए गौत्र के माध्यम से रिश्ते तलाशने की बडी मुसिबत बन जायेगी । भविष्य में जाने-अनजाने एक ही गौत्र में शादी-विवाह के रिश्ते हो जायेंगे l

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गौत्र शब्द के बारे में अगर आप विस्तार से पढ़ेंगे तो जानेंगे कि गौत्र से हमारे वंश या कुल की पहचान होती है । गौत्र प्रणाली का मुख्य उद्देश्य किसी व्यक्ति को उसके मूल प्राचीनतम बुजुर्ग से जोड़ना है । प्रगतिशील समाज के लिए मानव के उत्थान के लिए गौत्र बहुत ज़रूरी भी है l मानव विकास के लिए कड़े नियम भी ज़रूरी है विशेषकर रिश्तों के बीच, नही तो मानव और जानवर में कोई अंतर नही रहेगा l

अब सवाल यह उठता है कि एक ही गोत्र में इंसान को शादी क्यों नहीं करनी चाहिए इसका सबसे बड़ा रीजन है अनुवांशिक दोष (जेनेटिक बीमारियाँ) । एक ही गोत्र में शादी करने वाले दंपत्तियों में समान गुण सूत्र होने के कारण संतान में एक सी विचारधारा, पसंद, व्यवहार आदि में कोई नयापन नहीं होता । साथ ही ऐसे बच्चों में रचनात्मकता का अभाव होता है । कई शोध में भी इस बात का खुलासा हो चुका है कि एक ही गोत्र में शादी करने पर अधिकांश दंपत्तियों की संतान मानसिक रूप से विकलांग, नकरात्मक सोच वाले, अपंगता और अन्य गंभीर रोगों जैसे हिमोफिलिया,कलर ब्लाइंडनेस, ऐल्बिनिज़म आदि के साथ जन्म लेती है । वैज्ञानिकों ने भी यह बात सत्य मानी है कि यदि लोग कभी भी एक ही गोत्र में विवाह करेंगे तो उनको ऐसी प्रॉब्लम का सामना करना पड़ेगा । इसलिए एक ही गोत्र में शादी करने से बचना चाहिए ।

वर्तमान मे हमारे समाज के लोग अपने मूल जाति के गौत्र छूपा कर अन्य जातियों के मिलते जुलते गौत्र लिख रहे है जो समाज के गौत्रो के प्रति उनके मन में हीनभावना है l नाम के साथ गोत्र लगाना कोई शर्म की बात नही बल्कि गर्व की बात है, अपने पुरखों के प्रति सम्मान है l जो अपने पुरखों का या अपने बड़ों का सम्मान नही करता वो खुद क्या सम्मान पायगा, गोत्र आपकी एक पहचान है और अपनी पहचान को वो छुपाता है l यह हीनभावना व्यक्तिगत परेशानी हुई लेकिन इसका असर समस्त रैगर समाज पर हो रहा है l इस समस्या का समाज की महासभा,पंचायते व विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रबुद्ध लोगो को मिल बैठकर कोई समाधान जरुर निकालना चाहिए l

विदेश या भारतवर्ष के किसी भी कोने में आपके गोत्र का आपको मिल जायगा तो आपको एक अजीब सी खुशी होगी क्योंकि वहाँ आपके अंदर एक अहसास होगा की ये मेरा भाई या बहन है, परदेश में भी मेरा कोई अपना है और वो आपका औरों से बेहतर ख़याल रखेगा l गौत्र हमारे पूर्वजों का याद दिलाता है साथ ही हमारे संस्कार एवं कर्तव्यों को याद दिलाता रहता है । इससे व्यक्ति के वंशावली की पहचान होती है एवं इससे हर व्यक्ति अपने को गौरवान्वित महसूस करता है ।

सभी राज्यो के जहा जहा रैगर समाज के लोग रहते है वहा से बहुत पढे लिखे प्रबुद्ध सुझवान झुझारू जागरूक बुद्धिजीवी जो रैगर समाज के गौत्र पर शोध कर एकीकृत सुझाव दे ऐसे लोगो की समिति बना कर हल किया जा सकता है l गौत्रो के उदगम स्थल के बारे में तर्कयुक्त और प्रमाणित इतिहास के आधार पर व्यापक चर्चा कर समाज के शुद्ध गौत्रो का शुद्धिकरण कर एकीकृत समाज गौत्रो की सूची को मान्यता दी जाये l बाकि किसी भी गलत नाम के प्रचलित गौत्रो को रोकने के लिए सामाजिक सम्मेलनों की व्यवस्था द्वारा सुधार लाया जाये l

(गौत्र व्यवस्था पर यह मेरे निजी विचार है, आप सबके अलग अलग विचार हो सकते हैं l)

डिसक्लेमर : ऊपर व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार है, व्यक्त किए गए विचार समाजहित एक्सप्रेस  के नहीं हैं, तथा समाजहित एक्सप्रेस  उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है l

अखिल भारतीय रैगर महासभा के चुनाव-2019 में निम्न में से किसे राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनना चाहते है ?

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