पे बेक टू सोसाइटी के पावन उद्देश्य की भावना से ओत-प्रोत “रैगर आफिसर्स क्लब”

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दिल्ली, समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगाँवलिया) । किसी भी समाज के विकास में समाज के लोगो का अविस्मरणीय योगदान होता है l  इस बात को रैगर समाज ने हमेशा अपने कर्म और मानवता के धर्म से चरितार्थ किया है l प्राचीन काल में हमारे समाज के महापुरुषों और गुरुओ ने देश, काल और परिस्थितियों की माँग के अनुसार अपने व्यक्तित्व को ढालकर तत्कालीन राजनैतिक, सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक जीवन को गहरे में प्रभावित किया था । उन्होंने भक्ति, ज्ञान, उपासना, अध्यात्म एवं दर्शन सन्देश से समाज में व्याप्त कुप्रथाओं, अंधविश्वासों, जर्जर रूढ़ियों और पाखण्डों को दूर करने के लिए लोगो में आत्मबोध जगाया और समाज-व्यवस्था को एक नई दिशा दी । उनका मुख्य उद्देश समाज में समानता, भाई चारा प्रस्थापित करके, पाखंड के कर्म काण्ड, उंच- नीच के भेदभाव को मिटाना था ।

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माता-पिता केवल हमारे शरीर की उत्पत्ति के कारण है लेकिन हमारे जीवन को सुसंस्कृत करके उसे सर्वांग सुंदर बनाने का कार्य गुरु का ही रहा है। प्राचीन काल में गुरु ही शिष्य को सांसारिक और आध्यात्मिक दोनों तरह का ज्ञान देते थे लेकिन आज वक्त बदल गया है । आज जिस तरह का माहौल समाज में बनता जा रहा है, अनैतिकता और अराजकता फैलती जा रही है, हिंसा और आतंक बढ़ता जा रहा है, और अपराध की जीवनशैली बन गयी है। इसका मूल कारण गुरु को नकारकर, चरित्र को नकारकर हमने केवल भौतिकता को जीवन का आधार बना लिया है ।

इतिहास गवाह है किसी भी समाज के विकास में समाज के लोगो का ही अविस्मरणीय योगदान होता है l  इस बात को रैगर समाज के ऑफिसर्स ने पे बेक टू सोसाइटी के पावन उद्देश्य की भावना से रैगर आफिसर्स क्लब का गठन किया l जिसके अंतर्गत समाज के आर्थिक रूप से कमजोर प्रतिभावान विद्यार्थियों को शिक्षा प्राप्त करने में किसी प्रकार की रूकावट ना आये, इसके लिए उनका चयन कर उन्हें छात्रवृति प्रदान कर रहे है l इसके अलावा रैगर आफिसर्स क्लब अन्य समाज कल्याण हेतु रचनात्मक कार्य कर रहा है l

दिल्ली सरकार से रिटायर्ड ऑफिसर गनपत राय मोहनपुरिया ने समाजहित एक्सप्रेस ग्रुप में लिखा है कि “मैं रैगर आफिसर्स क्लब के समस्त सदस्यो का स्वागत व अभिनन्दन करता हूँ l आप सभी रैगर समाज की दिशा व दशा तय करेगे । शिक्षा ही समाज की सबसे मजबूत कडी है । मेरी आप सभी से प्रार्थना है कि रैगर समाज के धर्मगुरूओ ने आजादी से पहले सम्पुर्ण भारत मे गाँव-गाँव, ढाणी-ढाणी जाकर समाज में व्याप्त कुप्रथाओं, अंधविश्वासों, रूढ़िवाद,शोषण, जबरन काम कराने के विरुद्द सत्संग के माध्यम से समाज में अलख जगाया । उस समय शिक्षा व समाज के संगठन को जीवन से जोडने का सन्देश दिया। राजाओ व रजवाडो, जमीदारो के अत्याचारो के खिलाफ लडाईया लडी। कई बार इन्हे उन लोगो ने काठनुमा जेल मे बन्द करके यातनाए दी । हमारे धर्मगुरूओ ने अपना सब कुछ त्यागा परन्तु अपना मिशन नही छोडा । आप लोगो का सामाजिक फर्ज है कि सर्वप्रथम अपने गुरूओ का सामाजिक कार्यक्रमो व लैटर हैड पर चित्र लगा कर समाज को सन्देश दे, जिन्होने हमारे रैगर समाज के उज्जवल भविष्य के लिये त्याग व बलिदान दिया l आज उपभोगतावाद के समय में समाज को इस बात की अधिक आवश्यकता है। अपने गुरूओ ने किसी जाति व धर्म के विरुद्द कभी भी रैगर समाज को भडकाया नही ।

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