दुनिया के सबसे महान सैद्धांतिक भौतिक व अंतरिक्ष विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग की प्रथम बरसी पर श्रृद्धांजलि

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Physicist Stephen Hawking outside a hotel in Bombay on January 3, 2001. Hawking is in the western Indian city for an international conference titled "Strings 2001" with other leading physicists from around the world. JSG/CLH/ - RP2DRIFQGMAA

शारीरिक विकलांगता लोगों को तब तक अक्षम नहीं बना सकती, जब तक वह ख़ुद को ऐसा न मान लें- स्टीफन हॉकिंग

दिल्ली, समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगाँवलिया) । विश्व प्रसिद्ध ब्रिटिश भौतिक विज्ञानी और ब्रह्माण्ड के रहस्यों को उजागार कर रिसर्च की दुनिया में अपनी खास छाप छोड़ने वाले स्टीफन हॉकिंग का 76 वर्ष की उम्र में 14 मार्च, 2018 को निधन हो गया । विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक स्टीफेन हॉकिंग ऐसी प्रतिभा थे, जिन्होंने ब्रह्मांड के राज का पता लगाने में अपना जीवन समर्पित कर दिया l स्टीफन हॉकिंग की प्रथम बरसी पर विज्ञानं जगत के लोगो ने उनकी याद कर श्रृद्धा सुमन अर्पित किये l

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प्राप्त जानकारी के मुताबिक स्टीफन हॉकिंग का जन्म इंग्लैंड के ऑक्सफोर्ड में 08 जनवरी, 1942 को हुआ, ठीक इसी दिन महान खगोलज्ञ गैलिलियो गैलीली की 330 वीं पुण्यतिथि थी l सेंट एल्बन में अपने छोटे भाई के साथ पले-बढे l हॉकिंग बचपन से दिमागी तौर तेज थे l उन्हें 21 वर्ष की आयु यानि 1963 में स्नायु संबंधी बीमारी (एम्योट्रॉपिक लेटरल स्लेरोसिसस या मोटर न्यूरॉन) हुई और शुरुआत में डॉक्टरों ने कहा कि वह कुछ ही वर्ष जीवित रह सकेंगे l एम्योट्रॉफिक लेटरल स्लेरोसिस (ALS) ऐसी खतरनाक बीमारी थी । जिसमें शरीर की नर्वस जो मांसपेशियों को कंट्रोल करती है वो बंद हो जाती हैं ।

यह महान वैज्ञानिक अपनी बीमारी के कारण सिर्फ़ एक हाथ की कुछ उंगलियां ही हिला सकते थे, बाकी का पूरा शरीर हिल नहीं पाता था l वह अपने रोज़मर्रा के कार्यों-नहाने, खाने, कपड़े पहनने और यहां तक कि बोलने के लिए भी लोगों और तकनीक पर निर्भर थे l इस बीमारी के पहले स्टीफन कभी पढ़ाई पर ध्यान नहीं देते थे शायद यही एक कारण है जिसके पता चलते ही स्टीफन ने खुद को रिसर्च और विज्ञान की ओर समर्पित कर दिया । इस बीमारी के कारण हॉकिंग पूरी तरह से ह्वीलचेयर पर सिमट कर रह गया था, लेकिन उनका दिमाग काम करता रहा और वह पूरी ज़िंदगी ब्रह्मांड की गुत्थियां सुलझाने में व्यस्त रहे l

हॉकिंग ने 1970 में रोज़र पेनरोज़ के साथ मिलकर पूरे ब्रह्मांड पर ब्लैक होल के गणित को लागू किया और दिखाया कि कैसे हमारे निकट अतीत में एक सिंगुलैरिटी (रिलेटिविटी) मौजूद थी l ब्रह्मांड के निर्माण का बिग-बैंग सिद्धांत यही है l

हॉकिंग को असली प्रसिद्धी उनकी पुस्तक ‘अ ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम’ से मिली. पुस्तक का पहला संस्करण 1988 में प्रकाशित हुआ और लगातार 237 सप्ताह तक संडे टाइम्स का बेस्टसेलर रहने के कारण इसे गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल किया गया l

इस पुस्तक की एक करोड़ प्रतियां बिक चुकी हैं और 40 अलग-अलग भाषाओं में इसका अनुवाद हुआ है l इसके इलावा हॉकिंग ने ‘द ग्रैंड डिजाइन’, ‘यूनिवर्स इन नटशेल’, ‘माई ब्रीफ हिस्ट्री’, ‘द थियरी ऑफ एव्रीथिंग’ जैसी कई प्रसिद्ध किताबें लिखीं l

हॉकिंग को अल्बर्ट आइंस्टिन पुरस्कार, वुल्फ़ पुरस्कार, कोप्ले मेडल और फंडामेंटल फिजिक्स पुरस्कार से नवाज़ा गया l हालांकि इस महान वैज्ञानिक को नोबेल सम्मान प्राप्त नहीं हुआ l

स्टीफन हॉकिंग सन 1959 में पहली बार भारत यात्रा पर आए थे, दूसरी बार साल 2001 में 16 दिन की भारत यात्रा पर आए थे l इस यात्रा के दौरान भारत के आम लोगों को इस महान भौतिक विज्ञानी से परिचित करवाया गया l इस दौरान वे कई अकादेमिक संस्थानों के आयोजनों में शामिल हुए थे l

ब्रिटिश नागरिक होने के बावजूद तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने वर्ष 2009 में हॉकिंग को अमेरिका के सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान ‘प्रेसिडेंशियल मेडल ऑफ फ्रीडम’ से नवाज़ा था l

दुनिया के सबसे प्रसिद्ध भौतिकीविद और ब्रह्मांड विज्ञानी पर 2014 में ‘द थियरी ऑफ एव्रीथिंग’ नामक फिल्म भी बन चुकी है l इस फिल्म का निर्देशन जेम्स मार्श ने किया था l फिल्म में एडी रेडमायने ने स्टीफेन हॉकिंग और फेलिसिटी जोंस ने उनकी पूर्व पत्नी रहीं जेन हॉकिंग का किरदार निभाया है l

हॉकिंग ने एक बार कहा था, ‘मैं दुनिया को दिखाना चाहता हूं कि शारीरिक विकलांगता लोगों को तब तक अक्षम नहीं बना सकती, जब तक वह ख़ुद को ऐसा न मान लें l’

हॉकिंग ने कहा था, ‘मेरा लक्ष्य साधारण सा है l यह ब्रह्मांड को पूरी तरह समझना है कि यह ऐसा क्यों है और इसका वजूद क्यों है l’

स्टीफेन हॉकिंग ने चेताया था कि कृत्रिम बुद्धि विकसित करने और सोचने वाली मशीनें बनाने के प्रयास मानव नस्ल को ख़त्म कर सकती हैं l

जिस ह्वीलचेयर पर स्टीफेन हॉकिंग रहने के लिए बाध्य थे, वो कोई सामान्य व्हीलचेयर नहीं है, बल्कि इसमें वे सारे इक्विपमेंट्स लगे हुए हैं, जिनके माध्यम से वे विज्ञान के अनसुलझे रहस्यों के बारे में दुनिया को बता सकते हैं । उनकी व्हील चेयर के साथ एक विशेष कम्प्यूटर और स्पीच सिंथेसाइजर लगा हुआ है । जिसके सहारे वे पूरी दुनिया से बात करते हैं । हॉकिंग का सिस्टम इंफ्रारेड ब्लिंक स्विच से जुड़ा हुआ है । जो उनके चश्मे में लगाया गया है । इसी के माध्यम से वे बोलते हैं । इसके अलावा उनके घर और ऑफिस के गेट रेडियो ट्रांसमिशन से जुड़ा हुआ है । हॉकिंग का जज़्बा ऎसा है कि वे पिछले कई दशकों से अपनी व्हील चेयर पर बैठे-बैठे आम जन के लिये अंतरिक्ष विज्ञान की जटिल पहेलियों और रहस्यों को सुलझाते रहे हैं । इसमें वे काफ़ी हद तक सफल भी रहे ।

वर्ष 1974 में हॉकिंग ने भाषा की छात्रा जेन विल्डे से शादी की l  दोनों के तीन बच्चे हुए लेकिन 1999 में तलाक भी हो गया l  इसके बाद हॉकिंग ने दूसरी शादी की l प्राप्त जानकारी के अनुसार उनके परिवार में तीन बच्चे और तीन नाती-पोते हैं l कुछ दिनों पहले जब एक इंटरव्यू में उनसे पूर्ण रहस्य के बारे में पूछा गया तो जवाब दिया कि महिलाएं अभी भी पूर्ण रहस्य ही हैं l

आज स्टीफन हॉकिंग हमारे बीच में नहीं हैं, लेकिन उनके विचार प्रेरणा बनकर हमारे साथ सदैव जीवित रहेंगे । ब्रह्मांड की उत्पत्ति, ब्लैक होल, क्वांटम गुरुत्व पर अपने कार्यों के कारण वे विज्ञानप्रेमियों के बीच सदैव एक जिंदादिल, जीनियस और जांबाज के रूप में याद किये जायेंगे। अलविदा प्रोफेसर हॉकिंग !

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