रैगर ऑफिसर्स क्लब के अध्यक्ष ने पीलिया ग्रस्त गौतम सुवांसिया की मदद के लिए हाथ आगे बढाया

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दिल्ली, समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगाँवलिया) । अनेको बार ऐसी स्थिति निर्मित होती है कि जब ब्लड की जरूरत होती है l कुछ ऐसे भी परिवार होते है जिनके पास आर्थिक संकट की स्थिति होती है l ऐसी स्थिति का सामना राजस्थान के गांव खोखर के निवासी रामचंद्र सुवांसिया का हुआ उनका आठ वर्षीय बेटा गौतम पीलिया रोग से पीड़ित है, जोकि जयपुर के जे.के.लोन हॉस्पिटल में भर्ती है और उसे दस यूनिट चढ़ने के बाद चार यूनिट ब्लड की और जरुरत है l पीलिया के इलाज में इतना खर्च हो जाता है कि गरीब परिवार तो छोड़ दीजिए, सामान्य परिवार तक टूट जाते हैं l दुखी पिता की ओर से समाजहित एक्सप्रेस के संपादक रघुबीर सिंह गाड़ेगाँवलिया से मदद की गुहार की गई l

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समाजहित एक्सप्रेस न्यूज़ पोर्टल ने मंगलवार को एक लाचार पिता रामचंद्र सुवांसिया की तरफ से मदद की अपील प्रसारित की गई l अपील करने के बाद कई दानदाताओ ने अपना हाथ मदद के लिए आगे बढाया l जिसमे प्रमुख किशन चंद (9082232366) ने रक्त देने की स्वीकृति दी l उसके बाद रैगर ऑफिसर्स क्लब (ROC) के अध्यक्ष जय नारायण शेर (9413302007) ने मदद के लिए अपना हाथ आगे बढाया और ब्लड के इंतजाम के लिए डॉ.एस.एस. दरिया (सचिव ROC) से मोबाइल 9414270277 पर संपर्क करने को कहा l इनकी ऑफर आने से पहले ही ब्लड का इंतजाम हो चूका था l

रामचंद्र सुवान्सिया ने रक्त दानदाताओ व रैगर ऑफिसर्स क्लब (ROC) द्वारा मदद के लिए आगे आने और समाजहित एक्सप्रेस न्यूज़ पोर्टल के द्वारा अपील प्रसारित करने के लिए धन्यवाद व आभार व्यक्त किया है l उन्होंने आगे कहा कि इन सभी लोगो ने रैगर समाज में समाज सेवा करने की एक अनूठी मिसाल पेश की है। जिसके पास भी संसाधन सुविधा है वे लोग धर्मार्थ सेवा के कार्य में हिस्सा लें ताकि कोई भी गरीब दवाई व् रक्त की कमी से ना मरे, भूखा न रहे और सभी को अन्न, वस्त्र मिलें । ईश्वर इन दानदाताओ की कमाई में बरकत दे जिससे गरीबों, असहायों व जरूरतमंदों की मदद ऐसे ही होती रहे l

जब कहीं से रक्त नहीं मिलता, तब मानवता का परिचय देते हुए कोई गरीबों, असहायों व जरूरतमंदों की मदद करने के लिए रक्तदान करने के लिए आगे आता है तो वह व्यक्ति रोगी के लिए किसी मसीहा से कम नहीं होता है। खून एक ऐसा नायाब तोहफा है, जिसे न तो खरीदा जा सकता है और न बनाया जा सकता है। किसी की जान बचाने से बड़ा पुण्य काम और कोई नहीं हो सकता, इसीलिए रक्तदान को महादान कहा गया है।

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