रामलीला मैदान में भीम आर्मी और जगतगुरु श्री रविदास जी महाराज के अनुयायियो का विरोध प्रदर्शन

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दिल्ली, समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया) l तुगलकाबाद स्थित 600 साल पुराना ऐतिहासिक संत शिरोमणि रविदास जी महाराज का प्राचीन मंदिर तोड़े जाने की निंदनीय कार्रवाई का कड़ा विरोध व रोष 21 अगस्त को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैदासी अनुयायियो ने भारी संख्या में एकत्रित होकर जताया l भीम आर्मी लिखी नीली टोपी और टी-शर्ट पहने तथा संगठन का झंडा उठाए युवकों और बुजुर्गों की भीड़ के कारण विरोध प्रदर्शन रैली सफल रही l भीड़ के कारण दिल्ली की सड़कों पर जाम लग गया l

ऐतिहासिक संत शिरोमणि रविदास जी महाराज का प्राचीन मंदिर तोड़े जाने से रैदासी अनुयायियो की धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं l भीम आर्मी द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन में रैदासी अनुयायियो द्वारा मांग की गई है कि सरकार ने जो दिल्ली के तुगलकाबाद में रविदास मंदिर को ध्वस्त किया है उसे फिर से निर्माण करवाया जाए ताकि समाज के लोग अपने आप को सुरक्षित महसूस कर सकें ।

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बुधवार को विरोध प्रदर्शन रैली में संत शिरोमणि रविदास जी महाराज के अनुयायी पंजाब,हरियाणा,उतर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली व अन्य राज्यों से बसों व ट्रेन से दिल्ली आये थे l भीम आर्मी ने करोल बाग से रामलीला मैदान तक पदयात्रा की, इसमें शामिल लोग सरकार से काफी नाराज लग रहे थे l इस दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने व सुरक्षा के लिए पुलिस फोर्स और सुरक्षाबलों की तैनाती की गई थी l

बुधवार की रैली में कार की छत पर खड़े, ख़ास अंदाज़ में चंद्रशेखर प्रदर्शन का संचालन करते दिखे l एक हाथ में लाठी और दूसरे में भीम आर्मी का झंडा नज़र आ रहा था l

प्रदर्शकारी सवाल उठा रहे थे कि भारत में एक नहीं हज़ारों धार्मिक स्थल हैं जो सरकारी ज़मीन पर बने हैं तो सिर्फ़ दलितों के मंदिर को ही तोड़ने के लिए क्यों टारगेट किया गया l प्रदर्शनाकारी पहले रामलीला मैदान में जमा हुए और कुछ देर वहां रुकने के बाद दक्षिण दिल्ली का रुख़ किया l चन्द्रशेखर आजाद के जनसैलाब को दिल्ली पुलिस ने रोकने की कोशिश की। इस दौरान सड़क पर भारी जाम लग गया l

मंदिर उसी जगह बनाने के नारों के साथ भीम आर्मी के हजारों कार्यकर्ता-संत आगे बढे तो पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्का लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा । इसके बाद चंद्रशेखर और करीब 95 अन्य को बुधवार रात तुगलकाबाद इलाके से हिरासत में लिया गया । पुलिस ने बताया कि इस मामले में दंगा करने, अवैध रूप से एकत्र होने, लोकसेवक को उसका कर्तव्य पूरा करने से रोकने के लिए जानबूझकर चोट पहुंचाने और अन्य आरोपों में प्राथमिकी दर्ज की गई है । मामले की जांच जारी है।

आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद को हिरासत में लेने के बाद बृहस्पतिवार की सुबह उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया l दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (दक्षिण पूर्व) ज्ञानेश कुमार ने गिरफ्तारी की पुष्टि की l दिल्ली की एक अदालत ने भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर ‘आजाद’ और 95 अन्य लोगों को बृहस्पतिवार को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया l

उल्लेखनीय है कि इस विरोध प्रदर्शन में भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर के साथ ही केजरीवाल सरकार में सामाजिक कल्‍याण मंत्री राजेंद्र पाल गौतम और आम आदमी पार्टी AAP के कई विधायक भी शामिल हुए।

वहीं, संत रविदास मंदिर के तोड़े जाने पर पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी सांसद विजय गोयल का कहना है कि संत रविदास के मंदिर को दोबारा बनाया जाना चाहिए। सांसद ने इस मंदिर के निर्माण के लिए ‘गुरू रविदास जयंती समारोह समिति’ को अपनी एक महीने की सैलरी देने की भी बात कही है।

9 अगस्त 2019 को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस एम आर शाह की बेंच ने अपने फ़ैसले में लिखा है, “दिल्ली विकास प्राधिकरण दिल्ली पुलिस की मदद से कल तक यह ज़मीन खाली कराये और वहाँ मौजूद ढांचे को हटा दे l”

प्राप्त जानकारी के मुताबिक शुक्रवार (9 अगस्त) शाम को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर रात को क़रीब 9 बजे मंदिर के आसपास हज़ार से ज़्यादा पुलिसवाले तैनात कर दिए गए l विवादित ज़मीन से बाहर जाने के सब रास्ते बंद कर दिए गए l 10 अगस्त की सुबह 6 बजे जेसीबी मशीन की मदद से मंदिर को तोड़ना शुरू किया और 8 बजे तक पूरे ढांचे को गिरा दिया गया l

जोगिंदर सिंह अपनी मान्यताओं के आधार पर ये दावा करते हैं कि “वर्ष 1509 में जब संत रविदास बनारस से पंजाब की ओर जा रहे थे, तब उन्होंने इस स्थान पर आराम किया था l एक जाति विशेष के नाम पर यहाँ एक बावड़ी (कुआँ) भी बनवाई गई थी जो आज भी मौजूद है l यही वजह है कि रविदास के अनुयायियों में इस जगह की ख़ास मान्यता है l”

स्थानीय लोग यह भी कहते हैं कि रविदास 15वीं और 16वीं सदी के भक्ति आंदोलन के अहम संतों में गिने जाते हैं l साल 1959 में केंद्रीय मंत्री जगजीवन राम ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराकर 1 मार्च 1959 को संत रविदास मंदिर का उद्घाटन करने तुग़लकाबाद पहुँचे थे और इसका उद्घाटन किया था l

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