समाज विकास के लिए सबको सामाजिक एकता के लिए प्रयास करना होगा

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रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया (पत्रकार)

हमारे रैगर समाज में राजनीतिक परिदृश्य में संभावनाओं, नेतृत्व एवं विकल्पों की बहुतायत है । लेकिन सामाजिक एकता के अभाव में पिछड़े हुए है, इस बात से हम भली भांति परिचित हैं l हमारे रैगर समाज में धार्मिक नेतृत्व भी है जो धर्म एवं हमारी परंपराओं के बारे में मार्गदर्शन देता रहता है, इस बात से भी हम अवगत हैं l इन दोनों के बीच में फंसा हुआ है अपना समाज, क्योंकि अपने यहां समर्थ सामाजिक नेतृत्व का अकाल सा है । किसी भी सामाजिक संगठन और सामाजिक नेता ने समाज में हो रहे विभाजन, अत्याचार, अन्य जातियों द्वारा किये जाने वाले शोषण को रोकने, सामाजिक वैमनस्य को समाप्त कराने जैसे कार्यों को किसी ने लक्षित नहीं किया । किसी ने भी समाज को एकीकृत करने का लक्ष्य नहीं बनाया । धर्मगुरु स्वामी ज्ञान स्वरुप महाराज व त्यागमूर्ति स्वामी आत्माराम लक्ष्य जैसे संत-महात्मा तो दूर, कोई भोलाराम तोंगरिया और धर्मदास शास्त्री जैसा भी फिर नहीं आया जो सामाजिक बिखराव, अत्याचार,अन्याय, सामाजिक विषमताओं व कुरीतियों को दूर कर सके ।

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वर्तमान में हमने समाज से राजनीति व सामाजिक क्षेत्र में अपने अपने ग्रुप के बड़े नेता तो पैदा किए, लेकिन उन नेताओ ने राजनीति के अतिरिक्त सामाजिक एजेंडे को कभी आगे नहीं बढ़ाया । उन्हें तो केवल सत्ता, पद और अधिकार का लक्ष्य सामने दिखता है l सुविधाजीवी सोच कभी समाज विकास का बीड़ा नहीं उठाती । उनकी राजनीति के लिए समाज का व्यक्ति केवल एक वोटर है । धर्माधिकारियों के लिए समाज का व्यक्ति एक अनुयायी है । जिस दिन समाज का व्यक्ति इस बात को भलीभांति समझ लेगा तो समाज विकास की ओर अग्रसर होगा l हमारे समाज को केवल समर्थ सामाजिक नेतृत्व की जरूरत है l

अगर हमने सामाजिक एकता और समर्थ सामाजिक नेतृत्व के लिए कुछ नहीं किया गया तो सामाजिक बिखराव समाज को अनंतकाल तक डसता रहेगा । इसलिए समाज की एकता प्राथमिक आवश्यकताओं में से एक है । छोटे छोटे धड़ो और ग्रुप्स की अवधारणा से हटकर समाज की एकता और भाईचारे का वातावरण बनाने का समय हमारी प्रतीक्षा कर रहा है । सामाजिक एकता की शुरुआत कहीं से तो करनी ही होगी । इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति, परिवार और समाज का दायित्व है कि अपने अपने स्तर पर समाज में एकता स्थापित करने का प्रयास करे ।

(इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं l)

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