समाज की एकता और जागरूकता के बल पर बड़े से बड़ी जंग जीती जा सकती है – नवरत्न गुसाईवाल

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दिल्ली,समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया) l जयपुर में सोमवार 03 फरवरी को दोतानिया परिवार के एक वैवाहिक स्वागत समारोह के दौरान सामाजिक न्याय एवं मानव गरिमा संस्थान के सचिव नवरत्न गुसाईवाल ने सामाजिक चर्चा के दौरान सामाजहित एक्सप्रेस के वरिष्ठ पत्रकार रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया को बताया कि रैगर समाज हर क्षेत्र में सामाजिक विकास की जंग जीत सकता है, उसके लिए जरुरी है कि हम सब सामाजिक एकता के प्रति जागरूक हो और इसके अलावा जो समाज के विकास की लड़ाई लड़ रहे है, उनको अपने अहं का त्याग करना ही होगा ।  

नवरत्न गुसाईवाल ने कहा कि दिल्ली और राजस्थान के रैगर समाज के लिए मौजूदा समय बहुत सुनहरा है, जब हर गली कूचे में एक से बढ़कर एक रैगर नेता पैदा हो रहें हैं । सबके अन्दर समाज के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा है । अब पहले जैसी वो दिक्कते नहीं रहीं, हर व्यक्ति के अन्दर नेतृत्व का भाव जाग्रत होना, समाज के लिए एक शुभ संकेत है । हमारे लोग हर क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना पा रहें हैं यह अच्छा है । लेकिन हर सिक्के के दो पहलू होते हैं, तो हमारी नेतागिरी के भी दो पहलू हैं । हमारे छोटे-बड़े हर नेता के अन्दर समाज का काम करने के अलावा एक जो श्रेय लेने का भाव है,  वह हमारे खुद के ही कार्यों पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा करता हैं कि हमारे लिए समाज के काम आना ज्यादा महत्वपूर्ण है या हमारा ज्यादा नाम हो जाय यह ज्यादा महत्वपूर्ण है ?

 जब हम नेता बनने की कवायद में होते हैं तो यह भूल जाते हैं कि हमारे पहले या हमारे साथ जो लोग काम कर रहें हैं उनका योगदान भी राम सेतु के दौरान गिलहरी के प्रयास से कम मायने नहीं रखता । बेशक हम उनसे बड़ी लकीर खींच पा रहें हैं और हमारी नेतागिरी की फसल ज्यादा हरी-भरी दिख रही है, तो हमें यह भी याद रखना चाहिए, मौजूदा हरी-भरी दिख रही जमीन को उपजाऊ बनाने व  खाद-पानी देकर सींचने वाले लोग कम महत्वपूर्ण नहीं हैं ।

हमारे लोगों के अन्दर स्वाभिमान की मात्रा इतनी ज्यादा है कि यह स्वाभिमान कब अभिमान में बदल जाता है, हमें खुद ही पता नहीं चलता । लेकिन हमारा नेतृत्व तभी सफल कहा जा सकता है जब हमारे प्रबल प्रतिद्वन्दी भी हमारी तारीफ करने लगें । इसके लिए हमें सबको उचित सम्मान देते हुए सबको साथ लेकर चलने का माद्दा रखना ही होगा । इसलिए समाज की लड़ाई लड़ने वालों को अपना अहं का त्याग करना ही होगा।

हलांकि जिस रैगर समाज में हम पैदा हुए हैं उस समाज में कई मूलभूत समस्यायें हमेशा से ही रहीं हैं और हमारे समाज के उभरते नेतृत्वकर्ताओं ने हमेशा इन मूलभूत समस्यायों को दूर करने की लड़ाई लड़ी भी है । जिसमें सबसे महत्वपूर्ण जो मुद्दा रहा है, वो है हमारा समाज का सदियों से अपने मौलिक अधिकारों से वंचित रहना है, जिसके कारण शिक्षा व समाजिक ऐकता के प्रति उदासीनता, इसलिए ऐसे समय में हमे मौलिक अधिकारों से वंचित रहे अपने समाज के लोगो को शिक्षित व जागरुक कर उनका मनोबल उपर उठाने की महत्वपूर्ण आवश्यकता है, ताकि वह अपने हक और अधिकार के प्रति सचेत होकर नेतृत्व कर्ताओं को जनसमर्थन दे सके । मौलिक अधिकारों के प्रति जागरूक करने के इस पुनीत कार्य के लिए सामाजिक न्याय एवं मानव गरिमा संस्थान ने संविधान निर्माता भारत रत्न डॉ० भीमराव अम्बेडकर जी को समर्पित ‘सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याणकारी योजनायें’ नामक पुस्तक की प्रतियाँ जन-जन को निशुल्क वितरित कर समाज उत्थान में प्रयासरत है l इस कार्य में हम समाज के प्रबुद्धजनों से सहयोग की आशा सहित कामना करते है l

हमारी आपसी नोक-झोंक हमारे समाज की लड़ाई को कमजोर ही करेगी, गलत का विरोध करना अपनी जगह जायज तो है, लेकिन सामाजिक एकता के लिए सही का समर्थन करना, सत्य के साथ खड़ा होना उससे भी कहीं ज्यादा जरूरी है । इसलिए आइए अपने समाज के साथ एकजुट होकर खड़े होकर समाजिक एकता का परिचय देकर समाज का मनोबल उंचा करें, क्योंकि इतिहास गवाह है बड़े से बड़ी जंग केवल उच्च मनोबल से ही जीती जा सकती है ।        

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