सामाजिक सरोकारो से ही समाज की दिशा और दशा को बदला जा सकता है

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दिल्ली,समाजहित एक्सप्रेस (रघुबीर सिंह गाड़ेगांवलिया) l  आज तेजी से बदलते सामाजिक परिवेश में समाज का आम आदमी अपने जीवन की मूलभूत समस्याओं पर चारों और अटका, लटका और भटका हुआ है l जिसका मुख्य कारण है कि देश की आज़ादी के 70 वर्ष बाद भी समाज के आम आदमी की जरूरतों की पूर्ति के लिए किये गए सरकारी और सामाजिक प्रयासो से जितना विकास कार्य होना चाहिए था उतना नहीं हो सका और समाज का आम आदमी अपनी गरीबी, रोजी-रोटी व जीवन की मूलभूत सुविधाओ जैसी समस्याओं से ऊपर उठ ही नहीं पाया l सामाजिक नेताओ ने समाज के आम आदमी को अपने स्वार्थ की राजनीति की पूर्ति के लिए एक उत्पाद की तरह प्रयोग किया है l

सामाजिक नेता और कार्यकर्ता के लिए सामाजिक सरोकार का मतलब होता है समाज में परस्पर व्यवहार, वह समाज के आम आदमी के पास आए, उनसे उनकी विभिन्न मूलभूत समस्याओं के बारे में बात करे और उनकी समस्याओं के निवारण की व्यवस्था करें या करवाये l यही सामाजिक सरोकार है l

आज वास्तविकता ये है कि हमे अपना समाज तो जरुर दिखता है, पर हमारे समाज में से सामाजिक सरोकार गायब है l  इसलिए हमें ये बात याद रखने की जरुरत है कि सामाजिक सरोकार से ही समाज की दिशा और दशा को बदला जा सकता है । हमे समाज में सामाजिक मुद्दों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, कुरीतियाँ, न्याय, सांस्कृतिक, पानी, बिजली और सड़क आदि की समस्याओ पर सामाजिक सरोकार रखने की अति आवश्यकता है, हमें ये नहीं सोचना चाहिए है कि हमारे सामाजिक सरोकार की सोच पर कौन क्या कहेगा या क्या सोचेगा?

जब हम सामाजिक सरोकार के कार्यों से जुड़ते है तो कुछ लोग हमारे आलोचक होंगे तो कहीं न कहीं हमारे समर्थक भी होंगे l ऐसे में ना तो कभी हमे अपने समर्थकों पर गर्व करना चाहिए और ना ही आलोचकों पर गुस्सा, ये दोनों ही प्रकार के लोग हमारे अपने समाज के ही हिस्से हैं l  इतिहास गवाह है आज तक कोई भी इन्सान बिना आलोचक के कभी बेहतर नहीं बन पाया l  तभी तो कबीर साहब ने कहा है :

निंदक नियरे राखिए, ऑंगन कुटी छवाय, बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय।

हमारा जीवन ईश्वर का दिया एक उपहार है इसे व्यर्थ न जाने दे l यदि हम सामाजिक सरोकार वाले किसी भी कार्य में स्वयं को भागीदार बनायेंगे तो हम प्रेम, दया, उदारता, सहयोग, परहित, सहानुभूति, करुणा, संवेदना, परोपकार और मानवता आदि मानवीय मूल्यों के किताबी ज्ञान से हटकर इनके वास्तविक अर्थों को न केवल जान पायेंगे अपितु जीवन के किसी भी कमजोर क्षण में स्वयं के आत्मबल और विश्वास को कभी भी खो नहीं सकेंगे l

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